वो हमारा बचपन था
रिश्तो की एहमियत थी,
माँ बाप मे हिम्मत थी,
बच्चो के आँखो मे इज्जत थी,
वो हमारा बचपन था,
उन दिनो सबकी किमत थी...।।
बढो के आगे झुकना शराफत थी,
छोटो को डाटना जिम्मेदारी थी,
किसिको मदत करना इंसानियत थी,
अपनी चिजे शेअर करने की इजाजत थी,
मगर किसिका कुछ घर लाओ तो माँ डाटती थी,
वो हमारा बचपन था,
उन दिनो सबकी किमत थी...।।
खुद की गलती मानना समझदारी थी,
जरूरत से ज्यादा कमाना बेवकुफी थी,
जमीन पर बैठना शान थी,
जमीन ही हमारी माँ थी,
माँ बाप ही हमारी पहचान थी,
वो हमारा बचपन था,
उन दिनो सबकी किमत थी...।।
माँ बाप मे हिम्मत थी,
बच्चो के आँखो मे इज्जत थी,
वो हमारा बचपन था,
उन दिनो सबकी किमत थी...।।
बढो के आगे झुकना शराफत थी,
छोटो को डाटना जिम्मेदारी थी,
किसिको मदत करना इंसानियत थी,
अपनी चिजे शेअर करने की इजाजत थी,
मगर किसिका कुछ घर लाओ तो माँ डाटती थी,
वो हमारा बचपन था,
उन दिनो सबकी किमत थी...।।
खुद की गलती मानना समझदारी थी,
जरूरत से ज्यादा कमाना बेवकुफी थी,
जमीन पर बैठना शान थी,
जमीन ही हमारी माँ थी,
माँ बाप ही हमारी पहचान थी,
वो हमारा बचपन था,
उन दिनो सबकी किमत थी...।।
...आशुतोष गायकवाड
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