मै कश्मिरी पंडित हू
अपने ही घर मे मै काटा गया हू,
अपने ही मुल्ख से मै भगा दिया गया हू,
मत पुछो मुझसे उस रात की कहानी,
कैसे कहू उस रात कितने अपनो को खोकर मै जिंदा रहा हू,
मुझसे मेरा दर्द ना पुछो मै इक कश्मीरी पंडित हू...।।
हसीन वादीयो मे बसी मेरी खुशनूमा जिंदगी कैसे मौत के आग मे जल रही थी,
बच्चे जिंदगी मांग रहे थे तो औरते अपनी इज्जत बचाने के लिये मर रही थी,
काफिर केह कर हमे बस काटा जा रहा था,
धर्म के नाम पर हमे बाटा जा रहा था,
फिर भी हम हमारे धर्म पर अडे रहे थे,
हिंदू होना अगर गुनाह है तो हम गुन्हेगार है यह केहकर खडे रहे थे,
उस गुनाह की सजा आज भी भूगत रहा हू,
मुझसे मेरा दर्द ना पुछो मै इक कश्मीरी पंडित हू...।।
हमारे मौत से किसिको कुछ फरक ना पडा,
क्युकी हम मे से कोही आतंकवाद की और ना बढा,
फिर भी कुछ लोगो के नजरो मे आज वो सही और गलत हम है,
मेरे दर्द की दास्तान बता दू तुम्हे भाईयो पर सोचता हू तुम्हारी जिंदगी मे भी गम कहा कम है,
मेरा दर्द सुनाकर हर बार सिर्फ मै अकेला ही रोया हू,
मुझसे मेरा दर्द ना पुछो मै इक कश्मीरी पंडित हू...।।
अपने ही मुल्ख से मै भगा दिया गया हू,
मत पुछो मुझसे उस रात की कहानी,
कैसे कहू उस रात कितने अपनो को खोकर मै जिंदा रहा हू,
मुझसे मेरा दर्द ना पुछो मै इक कश्मीरी पंडित हू...।।
हसीन वादीयो मे बसी मेरी खुशनूमा जिंदगी कैसे मौत के आग मे जल रही थी,
बच्चे जिंदगी मांग रहे थे तो औरते अपनी इज्जत बचाने के लिये मर रही थी,
काफिर केह कर हमे बस काटा जा रहा था,
धर्म के नाम पर हमे बाटा जा रहा था,
फिर भी हम हमारे धर्म पर अडे रहे थे,
हिंदू होना अगर गुनाह है तो हम गुन्हेगार है यह केहकर खडे रहे थे,
उस गुनाह की सजा आज भी भूगत रहा हू,
मुझसे मेरा दर्द ना पुछो मै इक कश्मीरी पंडित हू...।।
हमारे मौत से किसिको कुछ फरक ना पडा,
क्युकी हम मे से कोही आतंकवाद की और ना बढा,
फिर भी कुछ लोगो के नजरो मे आज वो सही और गलत हम है,
मेरे दर्द की दास्तान बता दू तुम्हे भाईयो पर सोचता हू तुम्हारी जिंदगी मे भी गम कहा कम है,
मेरा दर्द सुनाकर हर बार सिर्फ मै अकेला ही रोया हू,
मुझसे मेरा दर्द ना पुछो मै इक कश्मीरी पंडित हू...।।
Hearthouch 💖
ReplyDeleteThank u so much
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